Saturday, May 30, 2020

Socha na tha...



किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..


आम का मौसम होगा और हम गुठलियों को तरस जाएँगे,
न cold coffee, न milk shakes, न ice creams ही जमाएँगे..
किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..

मुलाक़ातें न होंगी यारों से, हम अक़ेले ही peg बनाएँगे,
छुट्टियाँ तो ढेरों होंगी, बस हम मना नहीं पाएँगे..
किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..

Hill stations सब ख़ाली होंगे और अपनी तरफ़ बुलाएँगे,
रास्ते भी ख़ाली होंगे मगर, हम जा कहीं नहीं पाएँगे..
किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..

गाड़ियाँ सब खायेंगी धूल, सब्ज़ी हम पैदल लाएँगे,
हवा हो जाएगी साफ़, हम फिर भी mask लगाएँगे..
किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..

सोचा तो नहीं था, पर ये पल आ ही गिरे हैं झोली में तो -
हम भी थोड़ा ठहर जाएँगे..
कुछ खुद पे वक्त बिताएँगे..
कुछ गाएँगे, गुनगुनाएँगे..
और Dalgona Coffee भी बनाएँगे...
गुज़र तो आंधियाँ भी जाती हैं और बड़े बड़े तूफ़ाँ भी,
ये पल भी धीरे धीरे गुज़र ही जाएँगे..
ये पल भी धीरे धीरे गुज़र ही जाएँगे...

Sit tight and hold on...



ग़म की है बरसात, बरसात ही तो है.. गुज़र जाएगी.
कुछ डरने की भी है बात, पर बात ही तो है.. बिसर जाएगी.
बच के रहो बचा के रहो, सपने सारे सजा के रहो,
काली ही सही रात, पर रात ही तो है.. सुबह फिर आएगी.

Hero




आओ सुनाऊँ एक कहानी,

एक था हीरो, नाम पता नी..
हीरो ने बहुत पढ़ायी की,
पढ़ पढ़ के पास तन्हायी की..
हीरो को फिर इक मिली नौकरी,
नौकर चाकर भी और छोकरी..
हीरो पे अब पैसा था,
हीरो कुछ हम तुम जैसा था..
पर हीरो इक दिन गुज़र गया,
हीरो बेचारा मर गया!!!



क्या हुआ? 
कहानी छोटी थी? पसंद नहीं आयी?
छोटी थी तो बड़ी बना लो,
ख़ुशियों की फुलझड़ी बना लो..
तुम ही तो तुम्हारे हीरो हो न?
हीरो वाले कुछ काम निभा लो..
मरना तो तुम्हें भी है इक दिन,
उससे पहले कुछ नाम कमा लो!!!