Tuesday, March 22, 2022

Kuchh bol mat...

 

दिल टूटा है, वो छूटा है, अब कुछ हो नहीं सकता.

रोने का दिल तो है बहुत, पर रो नहीं सकता.
कहने सुनने को तो बहुत कुछ है मगर,
अपनी बातों को मैं शब्दों में पिरो नहीं सकता..
तो टूटे दिल के इन टूटे लफ़्ज़ों को तोल मत,
तू बस सुन, कुछ बोल मत...

फिरने का शौक था उसे, सुना है वो कशी निकल गया,
पर ये मेरा प्यार है.. इसे वो गंगा में धो नहीं सकता.
लोग कह रहे हैं कि कोई और मिल गया उसे शायद,
वैसे वो इतना बेवफा भी हो नहीं सकता.
हुआ होगा कुछ..
मेरे यार कि बेवफाइयों को तोल मत.
भाई, तू बस सुन, कुछ बोल मत.

उसे हमेशा ये गुमान था कि बहुत हैं उसके चाहने वाले,
पर मुझ जैसा उसे कोई चाहे ये भी हो नहीं सकता..
खैर वो मेरे साथ नहीं, तो कोई बात नहीं,
वो खुश है इससे बड़ा सुकून दुनिया में हो नहीं सकता.
अब मेरे इन ख़ुशी के इन अश्कों को मोल मत.
यार तू बस सुन, कुछ बोल मत.

मैं जानता हूँ कि तू भी भरा बैठा है,
तूने समझाया भी था मुझे, मगर अब पुराने पाप तो मैं धो नहीं सकता.
अच्छा है कि तुझ जैसा दोस्त भी बना लिया था मैंने,
इश्क़ सभी का साथ दे, हमेशा तो हो नहीं सकता..

सुनता तो रोज़ है तू मुझे, और सुनाता भी है... लेकिन आज,
ज़ोर से बाँहों में भर ले मुझे, और कुछ देर के लिए खोल मत.
मेरे दोस्त, आज तू बस सुन, कुछ बोल मत..
मेरे यार, आज तू बस सुन, कुछ बोल मत...