Tuesday, November 3, 2020

Take it easy.. आराम से!!!



 

दिन होता है कब रात हुई?

कब धूप छाँव बरसात हुई?

तू फँसा रहा deadline में..

यारये भी कोई बात हुई?

ना शुरू हुईना बंद होगी - तेरी कम्पनी तेरे नाम से.

तोथोड़ा रुक जा.. ठहर जा.. जी ले थोड़ा आराम से!!!


पैसे के पीछे भाग रहा,

तू दिन में - रात में जाग रहा..

रिश्तों को ताक़ पे रखा है,

यारी को बस WhatsApp रहा..

पैसा तो आता जाता है, chill मारलड़ा ले जाम से.

थोड़ा रुक जा.. ठहर जा.. जी ले थोड़ा आराम से!!!


कुल चार पहर तो जीना था,

तू सोच ज़रा जज़्बातों से..

बचपन वाली अब सुबह नहीं,

दिन फिसला जाता हाथों से..

इससे पहले कि रात आए - कुछ बातें कर ले शाम से.

थोड़ा रुक जा.. ठहर जा.. जी ले थोड़ा आराम से!!!


जो होगा देखा जाएगातू डर मत  परिणाम से..

बस.. थोड़ा रुक जा.. ठहर जा.. जी ले थोड़ा आराम से!!!

Saturday, June 27, 2020

Mauka abhi hai...


तू खिड़की बंद ना कर कि, पतंगे घुस नहीं जाएँ
पतंगे घुस भी आए तो, क्या पता ख़ुशबुएँ लाएँ.. क्या पता गुनगुना जाएँ.

तू पर्दे क्यूँ गिराता है कि कीड़े काट ना खाएँ
वो कीड़े आ भी जायें तो, क्या पता रोशनी लाएँ.. क्या पता आतिशी छाए.

दरीचे क्यूँ लगाता है कि भँवरा दे ना दे दस्तक
वो भँवरा आ भी जाए तो, तितलियाँ साथ आ जाएँ.. क्या पता रंग भर जाएँ.

क्या पता ये भी हो जाए, क्या पता वो भी हो जाए
पता चल पाएगा कैसे, जब तलक तू नहीं चाहे...

वो दिन भी पास ही होगा, तू अंतिम श्वास में होगा
यही खिड़की यही पर्दा दरीचा भी, यही होगा.
नहीं होगा तो ये मौक़ा जो तेरे पास है अब तक
अधूरी ख़्वाहिशें होंगी, ये साला वक़्त नहीं होगा..

इसलिए आज ना ख़ुद को रोक़, ख्वाहिशों को मत मन में घोंट
जो करना है तू कर ले आज, ये सब कुछ  कल नहीं होगा
ये इच्छाशक्ति नहीं होगी,  ये बाहु बल नहीं होगा
जो करना है तू कर ले आज, ये मौक़ा  कल नहीं होगा...
ये मौक़ा कल नहीं होगा...

Saturday, May 30, 2020

Socha na tha...



किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..


आम का मौसम होगा और हम गुठलियों को तरस जाएँगे,
न cold coffee, न milk shakes, न ice creams ही जमाएँगे..
किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..

मुलाक़ातें न होंगी यारों से, हम अक़ेले ही peg बनाएँगे,
छुट्टियाँ तो ढेरों होंगी, बस हम मना नहीं पाएँगे..
किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..

Hill stations सब ख़ाली होंगे और अपनी तरफ़ बुलाएँगे,
रास्ते भी ख़ाली होंगे मगर, हम जा कहीं नहीं पाएँगे..
किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..

गाड़ियाँ सब खायेंगी धूल, सब्ज़ी हम पैदल लाएँगे,
हवा हो जाएगी साफ़, हम फिर भी mask लगाएँगे..
किसने सोचा था कि ऐसे भी दिन आएँगे..

सोचा तो नहीं था, पर ये पल आ ही गिरे हैं झोली में तो -
हम भी थोड़ा ठहर जाएँगे..
कुछ खुद पे वक्त बिताएँगे..
कुछ गाएँगे, गुनगुनाएँगे..
और Dalgona Coffee भी बनाएँगे...
गुज़र तो आंधियाँ भी जाती हैं और बड़े बड़े तूफ़ाँ भी,
ये पल भी धीरे धीरे गुज़र ही जाएँगे..
ये पल भी धीरे धीरे गुज़र ही जाएँगे...

Sit tight and hold on...



ग़म की है बरसात, बरसात ही तो है.. गुज़र जाएगी.
कुछ डरने की भी है बात, पर बात ही तो है.. बिसर जाएगी.
बच के रहो बचा के रहो, सपने सारे सजा के रहो,
काली ही सही रात, पर रात ही तो है.. सुबह फिर आएगी.

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आओ सुनाऊँ एक कहानी,

एक था हीरो, नाम पता नी..
हीरो ने बहुत पढ़ायी की,
पढ़ पढ़ के पास तन्हायी की..
हीरो को फिर इक मिली नौकरी,
नौकर चाकर भी और छोकरी..
हीरो पे अब पैसा था,
हीरो कुछ हम तुम जैसा था..
पर हीरो इक दिन गुज़र गया,
हीरो बेचारा मर गया!!!



क्या हुआ? 
कहानी छोटी थी? पसंद नहीं आयी?
छोटी थी तो बड़ी बना लो,
ख़ुशियों की फुलझड़ी बना लो..
तुम ही तो तुम्हारे हीरो हो न?
हीरो वाले कुछ काम निभा लो..
मरना तो तुम्हें भी है इक दिन,
उससे पहले कुछ नाम कमा लो!!!