आओ सुनाऊँ एक कहानी,
एक था हीरो, नाम पता नी..
हीरो ने बहुत पढ़ायी की,
पढ़ पढ़ के पास तन्हायी की..
हीरो को फिर इक मिली नौकरी,
नौकर चाकर भी और छोकरी..
हीरो पे अब पैसा था,
हीरो कुछ हम तुम जैसा था..
पर हीरो इक दिन गुज़र गया,
हीरो बेचारा मर गया!!!
क्या हुआ?
कहानी छोटी थी? पसंद नहीं आयी?
कहानी छोटी थी? पसंद नहीं आयी?
छोटी थी तो बड़ी बना लो,
ख़ुशियों की फुलझड़ी बना लो..
तुम ही तो तुम्हारे हीरो हो न?
हीरो वाले कुछ काम निभा लो..
मरना तो तुम्हें भी है इक दिन,
उससे पहले कुछ नाम कमा लो!!!
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