Saturday, May 30, 2020

Sit tight and hold on...



ग़म की है बरसात, बरसात ही तो है.. गुज़र जाएगी.
कुछ डरने की भी है बात, पर बात ही तो है.. बिसर जाएगी.
बच के रहो बचा के रहो, सपने सारे सजा के रहो,
काली ही सही रात, पर रात ही तो है.. सुबह फिर आएगी.

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